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आइसलैंड ने जनवरी से ही टेस्टिंग शुरू की, स्लोवेनिया में फरवरी में महामारी से लड़ने के लिए हॉस्पिटल्स और डॉक्टर्स को चुन लिया गया


  • न्यूजीलैंड, ब्रुनेई और त्रिनिदाद एंड टोबेगो में अब महज 1-1 एक्टिव केस हैं, आइसलैंड और कंबोडिया में इनकी संख्या 2-2 बची है
  • फैरो आइलैंड, अरूबा और मोंटेग्रो में अब जीरो एक्टिव केस हैं, डब्ल्यूएचओ गाइडलाइंस के तहत ये देश जल्द ही खुद को कोरोना मुक्त घोषित कर सकते हैं

दैनिक भास्कर

Jun 03, 2020, 08:44 AM IST

नई दिल्ली. स्लोवेनिया की सरकार ने 15 मई को देश में कोरोना महामारी को आधिकारिक रूप से खत्म घोषित कर दिया था। ऐसा करने वाला यह पहला यूरोपीय देश था। रोजाना महज एक या दो केस आने के कारण स्लोवाक सरकार ने यह ऐलान किया। मार्च के आखिरी में इसी देश में हर दिन 40 से 70 के बीच नए मामले सामने आ रहे थे, जो उस समय भारत में आ रहे मामलों के लगभग बराबर ही थे।

अब स्लोवेनिया में महज 6 एक्टिव केस हैं। कई और भी देश हैं जहां एक्टिव केस की संख्या इकाई के अंकों में सिमट गई है। आइसलैंड और न्यूजीलैंड जैसे देश भी इसमें शामिल हैं। 

कोरोना के खिलाफ बेहतर तैयारियों के कारण अब ये देश कोरोना मुक्त होने की कगार पर हैं। हमने इनकी इन्हीं बेहतर तैयारियों को समझने की कोशिश की। इसके लिए 100 से ज्यादा संक्रमितों वाले उन देशों को चुना जहां अब एक्टिव केस 1 से 10 के बीच में हैं। हमने ऐसे 12 देश पाए। इन्हीं देशों के महामारी से लड़ने के तरीकों पर एक रिसर्च रिपोर्ट…

आइसलैंड ने 5 मई तक अपनी 13.5% आबादी का कोरोना टेस्ट कर लिया था
आइसलैंड में कोरोना का पहला केस 28 फरवरी को आया था लेकिन जनवरी के आखिरी हफ्ते से ही यहां बाहर से आने वाले लोगों की हॉस्पिटल्स में टेस्टिंग शुरू कर दी गई थी, जबकि इस वक्त ज्यादातर देशों में एयरपोर्ट पर ही स्क्रीनिंग कर यात्रियों को जाने दिया जाता था। फरवरी की शुरुआत से ही यहां सोशल डिस्टेंसिंग और हाथ धोने जैसी सावधानियां बरतने के मीडिया कैंपेन शुरू हो चुके थे। 

5 मई तक आइसलैंड ने अपने 13% लोगों का कोरोना टेस्ट कर लिया था। वे लोग जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं थे, लेकिन दूसरे देशों से लौट रहे थे, उन सभी का टेस्ट किया गया। इससे यह भी पता चला कि 0.6% केस ऐसे थे जिनमें कोरोना के बिल्कुल भी लक्षण नहीं थे, लेकिन वे वायरस के वाहक बने हुए थे। ऐसे में वायरस के हॉट स्पॉट बने देशों से आए लोगों को आइसोलेट ही रखा गया। 

यहां टोटल लॉकडाउन की दरकार तो नहीं रही लेकिन हाई स्कूल, हेयर सलून और कुछ गैर जरूरी बिजनेस सेक्टर्स को 15 मार्च से बंद रखने की सलाह दी गई। ये 6 हफ्तों तक बंद रखे गए। 4 मई से इन सभी को भी खोल दिया गया।

न्यूजीलैंड में 48 घंटे में कोरोना पॉजिटिव की कॉन्टेक्ट ट्रैसिंग पूरी कर ली जाती थी

न्यूजीलैंड में 28 फरवरी को पहला केस मिला था। इससे 25 दिन पहले ही यानी 3 फरवरी से ही सरकार ने चीन से आने वाले यात्रियों की एंट्री पर रोक लगा दी थी, इसमें सिर्फ न्यूजीलैंड के नागरिकों को छूट थी। यहां जैसे ही मामले 100 के पार हुए तो 21 मार्च को सरकार ने अलर्ट सिस्टम इंट्रोड्यूस कर दिया, तब वहां लेवल-2 रखा गया था। 23 मार्च की शाम को लेवल-3 लगा और जब मामले 200 से ज्यादा हो गए तो 25 मार्च की दोपहर को लेवल-4 यानी लॉकडाउन लगा दिया गया।

न्यूजीलैंड में किसी व्यक्ति के कोरोना पॉजिटिव मिलते ही 48 घंटे के अंदर उसकी कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग हो जाती है। यानी, किसी व्यक्ति के कोरोना पॉजिटिव मिलने पर उससे पिछले दिनों में मिलने वाले सभी लोगों को अलर्ट किया जाता था और टेस्ट होने तक सेल्फ-क्वारैंटाइन में रहने की सलाह दी जाती थी।

यहां 5 हफ्तों के सख्त लॉकडाउन के बाद 28 अप्रैल से लॉकडाउन को लेवल-3 पर ले आया गया था। यानी सभी दुकानों और गैर जरूरी बिजनेस सेक्टरों को काम फिर से शुरू करने की परमिशन मिल गई थी।

स्लोवेनिया में फरवरी के पहले हफ्ते में ही महामारी से लड़ने के प्रोटोकॉल तय हो गए थे

स्लोवेनिया की सरकार ने 15 मई को ही देश में कोरोना महामारी को आधिकारिक रूप से खत्म घोषित कर दिया था। ऐसा करने वाला यह पहला यूरोपीय देश था। देश में कोराना का पहला मरीज 4 मार्च को मिला था लेकिन फरवरी के पहले हफ्ते में ही यहां महामारी से लड़ने के लिए बनी कमिटी के प्रोटोकॉल तय हो गए थे। इसमें कौन से हॉस्पिटल्स कोरोना संक्रमितों का इलाज करेंगे, किन डॉक्टर्स को जिम्मेदारी दी जाएगी, यह सब कुछ तय कर लिया गया था।

स्लोवेनिया में प्रधानमंत्री के इस्तीफे के बाद 13 मार्च को सरकार बदली थी और 16 मार्च को यहां टोटल लॉकडाउन लगा दिया गया था। समय रहते जल्दी लॉकडाउन लगाना और इसका सख्ती से पालन करवाना ही स्लोवेनिया की कोरोना महामारी पर जीत का कारण रहे। लॉकडाउन को सफल बनाने के लिए सरकार ने अपनी जीडीपी का 6% (3 अरब यूरो) हिस्सा देश के नागरिकों और बिजनेसमैन को दिया, ताकि लोगों के नुकसान की भरपाई हो सके।

यहां बाहर से आए हर व्यक्ति को 14 दिन के लिए क्वारैंटाइन किया गया। 15 मई के बाद सभी बिजनेस सेक्टर्स को यहां खोला जाने लगा, स्कूल भी खोल दिए गए। हालांकि पब्लिक इवेंट पर अभी भी पाबंदी जारी है।

आइजले ऑफ मेन ने बिना संक्रमित मिले ही लॉकडाउन कर दिया
एक लाख से कम आबादी वाले इस छोटे से देश में बिना संक्रमित मिले ही 16 मार्च को एक महीने के लिए लॉकडाउन लगा दिया गया था। इमरजेंसी पावर एक्ट के तहत यहां सोशल डिस्टेंसिंग न रखने वालों और सेल्फ आइसोलेशन नियमों को तोड़ने वालों से जुर्माना वसूलने का प्रावधान किया गया, सभी गैर जरूरी दुकानों को बंद रखने का आदेश दिया गया। 15 अप्रैल को इसे अगले 1 महीने तक बढ़ा दिया गया। यहां आखिरी केस 20 मई को आया था यानी पिछले 14 दिनों से यहां नया मामला नहीं आया है।

मॉरिशस 10वां सबसे ज्यादा घना देश, इसके बावजूद कोरोना संक्रमण रोकने में कामयाब रहा
अफ्रीकी महाद्वीप के दक्षिण-पूर्वी किनारे पर बसे इस देश की जनसंख्या महज 12 लाख के आसपास है लेकिन यह विश्व में 10वां सबसे ज्यादा घना बसा हुआ देश है। यही कारण रहा कि जब मॉरिशस में पहला केस (18 मार्च) मिला तो 2 दिन बाद से ही यहां स्कूलों, गैर जरूरी दुकानों और बॉर्डर को बंद कर दिया गया। 24 मार्च को जब केस 42 हो गए तो पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया गया। यहां सरकार की प्राथमिकता टेस्टिंग के साथ-साथ कॉन्टेक्ट ट्रैसिंग पर रही।

मॉरिशस का कोरोना को आसानी से हराने का एक कारण यह भी है कि यहां हेल्थ केयर सिस्टम बहुत अच्छा है। यहां प्रति हजार लोगों पर 3 बेड हैं। मॉरिशस सरकार सोशल प्रोटेक्शन पर अपनी जीडीपी का 9.3% खर्च करती है।

मोंटेग्रो में 28 दिन से नया केस नहीं मिला, सरकार अब देश को कोरोना मुक्त घोषित करने की तैयारी में
यूरोपीय देश मोंटेग्रो में कोरोना का आखिरी केस 5 मई को मिला था। महामारी से होने वाली आखिरी मौत (10 मई) को भी 23 दिन बीत चुके हैं। 24 मई के बाद से यहां कोई एक्टिव केस नहीं है। अब जल्द ही यहां सरकार डब्ल्यूएचओ गाइडलाइन्स के तहत देश को कोरोना मुक्त घोषित करने की तैयारी में है।

मोंटेग्रों ने पहला कोरोना केस मिलने के 2 दिन पहले ही यानी 15 मार्च को अपनी बॉर्डर सील कर दी थी। मार्च के शुरुआत में ही यहां स्कूलों को बंद कर दिया गया, भीड़ पर पाबंदी लगा दी गई। 26 मई तक मोंटेग्रो में कुल आबादी के 2% जनसंख्या का कोरोना टेस्ट हो चुका था।

फैरो आइलैंड में 23 अप्रैल को आखिरी केस मिला, 9 मई को सरकार ने कोरोना मुक्त घोषित किया
डेनमार्क के इस सेल्फ गवर्निंग आइलैंड ने 9 मई को ही खुद को कोरोना मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया था। ज्वालामुखी और चट्टानों के 18 द्वीपों के इस समूह में आखिरी केस 23 अप्रैल को दर्ज हुआ था। यहां कोरोना से कोई मौत नहीं हुई। 9 मई को जब यहां की स्थानीय सरकार ने प्रेस रिलीज में इलाके को कोरोना मुक्त घोषित किया, तब  48 हजार जनसंख्या वाले इस देश में 18% लोगों का टेस्ट किया जा चुका था।

फैरो आइलैंड के प्रधानमंत्री ने स्टेग नील्सन ने कोरोना पर सफलता का श्रेय समय पर उठाए गए जरूरी कदमों और लोगों द्वारा प्रशासन की गाइडलाइन्स को ठीक से मानने को दिया।

ग्लोबल हेल्थ सिक्योरिटी इंडेक्स में ब्रुनेई को रिस्क एन्वायरमेंट में स्कोर 66.7, इसी ने कोरोना को मात देने में कामयाबी दिलाई
देश के नेशनल आइसोलेशन सेंटर में अब महज 1 एक्टिव केस है। यहां 7 मई के बाद से कोई नया केस नहीं आया है। ब्रुनेई में टोटल लॉकडाउन तो नहीं किया गया लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कुछ जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए थे।

ग्लोबल हेल्थ सिक्योरिटी इंडेक्स 2019 में 32.6 स्कोर के साथ ब्रुनेई 128वें नम्बर पर था लेकिन इसी इंडेक्स में रिस्क इनवायरमेंट में उसका स्कोर 66.7 है, जो उसे इस तरह की आपात परिस्थितियों में बेहतर तैयारी वाला देश बताता है। यही कारण है कि ब्रुनेई ने इस महामारी को बिना लॉकडाउन के ही नियंत्रित कर लिया।

कंबोडिया में पहले लोकल केस मिलने के बाद की कहानी से समझें वहां की तैयारियां
कंबोडिया में 27 जनवरी को ही पहला कोरोना केस ट्रैस हुआ था। वुहान से लौटे एक 60 साल के बुजुर्ग को संक्रमित पाया गया था। इसके बाद से 7 मार्च को एक स्थानीय शख्स में कोरोना पाया गया। यह शख्स एक जापानी यात्री के संपर्क में आया था जिसे कम्बोडिया से लौटने के बाद जापान में 4 मार्च को कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। जैसे ही यहां की सरकार को यह सूचना मिली इसके फौरन बाद उस जापानी व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों को ट्रैस किया गया। इनमें से 3 की रिपोर्ट नेगेटिव आई और 1 पॉजिटिव मिला।

इन लोगों के संपर्क में आए 40 कंबोडियन लोगों को होम क्वारैंटाइन कर दिया गया। प्रशासन की इस फटाफट कार्रवाई से समझा जा सकता है कि कोरोना की इस लड़ाई को कंबोडिया ने कैसे जीता।

त्रिनिदाद एवं टोबेगो में सख्त लॉकडाउन ने संक्रमण रोका
त्रिनिदाद एवं टोबेगो में 26 अप्रैल के बाद 31 मई को कोरोना का नया संक्रमित मिला। शख्स पहले से ही क्वारैंटाइन था और पहले दो टेस्टों में उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। यहां पहला केस 12 मार्च को मिला और 29 मार्च को लॉकडाउन कर दिया गया। सख्त लॉकडाउन और पॉजिटिव पाए जाने वाले मरीजों की फौरन कॉन्टैक्ट ट्रैसिंग के कारण यहां मामले कम ही रहे। यहां कुल 3169 टेस्ट किए गए।

अरूबा में लॉकडाउन तोड़ने वालों को गिरफ्तार कर लिया जाता था
अटलांटिक महासागर के इस छोटे से आइलैंड ने 13 मार्च को पहला केस मिलने के 4 दिन बाद ही अपनी सीमाएं सील कर दीं थीं। यहां 28 मार्च से रात 9 से सुबह 6 बजे तक का कर्फ्यू लगाया गया था। साथ ही लोगों को बेहद जरूरी काम के लिए ही बाहर जाने की परमिशन थी। यहां मई तक कर्फ्यू तोड़ने वाले 180 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। महज 1 लाख जनसंख्या वाले इस देश में लॉकडाउन की इतनी सख्ती के चलते कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा मार्च के बाद ही थम गया। फिलहाल यहां कोई भी एक्टिव केस नहीं है।



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