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कोरोना वैक्सीन: ZEE NEWS से बोले दीपक पालीवाल – कई जिंदगियां बचाने के लिए दांव पर लगाई जान


नई दिल्ली: पूरी दुनिया कोरोना संकट के खौफ की चादर में लिपटी हुई है. पूरी दुनिया सिर्फ एक सवाल का जवाब पूछ रही है कि कोरोना की वैक्सीन कब तक आएगी? कोरोना के संक्रमण के खिलाफ भारतीय ‘दीपक’ ने कोरोना सकंट के अंधेरे का खत्म करने का संकल्प लिया है. भारतीय मूल के जयपुर के रहने वाले दीपक पालीवाल ने ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोविड-19 वैक्सीन के लिए अपनी जान दांव पर लगी दी. दीपक लंदन में फार्मा कंपनी में कंसल्टेंट के तौर पर काम करते हैं. दीपक ने ZEE NEWS को बताया कि उन्हें पता था कि उनकी जान खतरे में है लेकिन निश्चय कर लिया था कि विश्व कल्याण के लिए कुछ करना है. 

दीपक ने बताया, “डर तो लगा लेकिन मैंने निश्चय कर लिया था कि कुछ करना है. सबसे बड़ा डर यही था कि हम लोग यहां ब्रिटेन में अकेले हैं और माता-पिता भारत (जयपुर) में हैं. अगर कुछ भी गड़बड़ हुआ तो कौन जिम्मेदार होगा. न वो लोग हमें देख सकते हैं, न हम वहां जा सकते हैं. जोखिम तो हर ट्रायल में होता है.”

दीपक ने आगे बताया, “मार्च में हर जगह से कोरोना को लेकर निगेटिव खबरें आ रही थीं कि कोरोना यहां फैल रहा है, वहां फैल रहा है. कोरोना वैक्सीन को लेकर एक ह्यूमन ट्रायल चल रहा था. मैंने उसमें हिस्सा लेने का निश्चिय किया. उद्देश्य सिर्फ यही था कि अगर हमारी वजह से कुछ अच्छा हो सकता है, तो हो जाए.”

दीपक की मां शैल कुमारी को अपने बेटे दीपक को बधाई देते हुए कहा, “दीपक ने साहसिक कदम उठाया है. अपने परिवारों में यही शिक्षा दी जाती है कि स्वार्थ से ऊपर उठाकर परमार्थ पर ध्यान दें.”  

पत्नी को कैसे मनाया, इस सवाल के जवाब में दीपक ने कहा, “उन्होंने ट्रायल में हिस्सा लेने का विरोध नहीं किया. बस केवल उनको चिंता थी. ट्रायल में कई दवाओं का इस्तेमाल होता है लेकिन उनके असर को लेकर चिंता थी.” 

दीपक ने कहा, “ट्रायल से पहले कुछ रीडिंग मटेरियल दिया गया था. एक वीडियो दिखाया गया था जिसमें बताया गया कि ट्रायल से क्या-क्या इफेक्ट हो सकते हैं. फीवर से लेकर ऑर्गन डैमेज का जिक्र था. मौत होने का भी जिक्र था.”

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोरोना वायरस की वैक्सीन का पहला मानवीय परीक्षण सफल हो गया है. इसमें दीपक पालीवाल का अहम योगदान है. इसमें शामिल किए गए वॉलंटियर्स में वैक्सीन से वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हुई है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों को वैक्सीन के पूरी तरह सफल होने का भरोसा है. साथ ही उन्हें भरोसा है कि सितंबर 2020 तक ये वैक्सीन लोगों को उपलब्ध करा दी जाएगी.

इस वैक्सीन का उत्पादन AstraZeneca करेगी. वहीं, भारतीय कंपनी सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) भी इस परियोजना में शामिल है. सितंबर 2020 तक कोरोना के खिलाफ वैक्सीन आने की संभावना है. ब्रिटेन, अमेरिका, भारत, रूस सहित कई देशों में मानवीय परीक्षण हो रहा है. 

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