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छत पर ड्रम में उगाए 40 से ज्यादा किस्म के आम, ग्राफ्टिंग तकनीक से आम की नई किस्म ईजाद की; दावा किया कि यह सबसे मीठी प्रजाति


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  • Kochi Man Grows 40 Varieties Of Mangoes On His Rooftop Meet Joseph Francis Who Has Now Become A Full time Passion For Mangoes

एक घंटा पहले

  • जोसेफ फ्रांसिस पेशे से एयरकंडीशनर टेक्नीशियन हैं और फल आने पर इसे दोस्तों और रिश्तेदारों में बांट देते हैं
  • 1800 वर्ग फीट की छत पर विभिन्न किस्म के आमों का बगीचा खड़ा किया, कुछ किस्म के आम तो वर्ष में दो-दो बार फल दे रहे

बाल्टी में फूल-पौधे लगाने, छत पर सब्जियां उगाने की बातें बहुत सुनी होंगी, लेकिन कभी सुना है किसी ने छत पर आम के पेड़ लगाकर खूब आम पैदा किए हों, वह भी 40 किस्म के आम। एर्णाकुलम के रहने वाले 63 वर्षीय जोसेफ फ्रांसिस ने यह कर दिखाया है। वैसे तो ये एयर कंडीशनर के टेक्निशियन हैं, लेकिन इनके बुजुर्ग पिता किसान रहे हैं। यही कारण है कि इन्होंने 1800 वर्ग फीट की छत पर विभिन्न किस्म के आमों का बगीचा खड़ा कर दिया। कुछ किस्म के आम तो वर्ष में दो-दो बार फल दे रहे हैं।

250 तरह के गुलाब लगाए
इनके ननिहाल में देश के कोने-कोने से लाए गए गुलाब उगाए जाते थे। इनके कलेक्शन में ‘कट रोज’ किस्म सिर्फ इनके घर थी। नए घर में शिफ्ट होने के बाद जोसेफ ने 250 तरह के गुलाब और मशरूम लगाए। इन्होंने पॉलिथीन में आम के बड़े पौधे कहीं देखे। फिर सोचा बड़े पौधे पॉलिथीन में जीवित रह सकते हैं तो क्यों न ड्रम में इसके पेड़ लगाए जाएं? जोसेफ ने पीवीसी ड्रम खरीदे, उन्हें काटा और स्टैंड पर जमा दिया। बॉटम में चीरा लगाया ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके। इनमें लगाए पौधे अब 5 से 9 फीट के पेड़ बन गए हैं।

नामी-गिरामी किस्म के आम
इनके बगीचे में अल्फांसो, चंद्राकरन, नीलम, मालगोवा, केसर जैसी लोकप्रिय किस्मों समेत 40 से ज्यादा प्रजाति के आम हैं। इन्होंने ग्राफ्टिंग तकनीक से आम की एक नई किस्म ईजाद की है, जिसे पत्नी के नाम पर ‘पेट्रीसिया’ नाम दिया है। दावा है यह किस्म सबसे ज्यादा मीठी है।

सभी फल मुफ्त बांट देते हैं
आम के इस बगीचे की देखभाल करना सबसे चुनौतीपूर्ण काम है। समय-समय पर खाद-पानी, छंटाई, फलों की सुरक्षा बहुत जरूरी है। जोसेफ का कहना है उनका मकसद लाभ कमाना नहीं रहा। वे अपने सभी फल दोस्तों, रिश्तेदारों और आगंतुकों में मुफ्त बांट देते हैं। छुट्टी के दिन अनेक लोग इनके घर आम का बगीचा देखने आते हैं और मुफ्त में फल भी ले जाते हैं।

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