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107 साल की दुनिया की सबसे बुजुर्ग कोरोना सर्वाइवर वायरस को हराकर घर लौटी, जिस टूरिस्ट ग्रुप में ये शामिल थीं उनमें से 12 की मौत हुई


  • भतीजी ने कहा, हम उम्मीद छोड़ चुके थे लेकिन इलाज के दौरान वह शांत रहीं और खुद को डॉक्टर को साैंप दिया
  • कॉरनेलिया अब स्वस्थ हैं और इससे पहले 104 साल के एक अमेरिकन को दुनिया का सबसे बुजुर्ग कोरोना सर्वाइवर कहा गया था

दैनिक भास्कर

Apr 11, 2020, 02:17 PM IST

कोरोनावायरस को हराकर घर लौटने वाली 107 साल की कॉरनेलिया रास अब स्वस्थ हैं। वह चलफिर पा रही और घुटनों के बल बैठकर ईश्वर को धन्यवाद अदा कर रही हैं। नीदरलैंड की कॉरनेलिया को कोरोनावायरस का संक्रमण अपने ही देश में एक द्वीप की यात्रा के दौरान हुआ था। टूरिस्ट के इस ग्रुप में 40 लोग शामिल थे। इसमें से 12 की मौत हो चुकी है। लेकिन कॉरनेलिया थकीं नहीं, डरी नहीं और कोरोना को हराकर ही मानीं।

एक ट्रिप के दौरान हुआ था संक्रमण
कॉरनेलिया को संक्रमण के लक्षण तब पता चले जब वह चर्च में प्रार्थना करने के बाद घर पहुंची थीं। इन्हें हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। इलाज कर रहे डॉक्टर के मुताबिक, कॉरनेलिया का इलाज सफल रहा। भतीजी मायके डे ग्रूट के मुताबिक, हमने उम्मीद छोड़ दी थी कि वो वायरस को हरा पाएंगी। उनमें बुखार और खांसी के लक्षण दिखने शुरू हुए थे। इलाज के दौरान वह काफी शांत रहीं। उन्होंने खुद को पूरी तरह से डॉक्टर को सौंप दिया था। लेकिन अब वह स्वस्थ हैं। वह कोई दवा नहीं लेती हैं। वह अब धूप में बैठ रही हैं क्योंकि उन्हें बालकनी में बैठना काफी पसंद है।

तस्वीर साभार: रायटर

जन्मदिन में नहीं पहुंच सके घरवाले
न्यूजीलैंड के एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, बीमार होने के कुछ दिन पहले कॉरनेलिया 107वां जन्मदिन था लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग के कारण उन्होंने इसे अकेले ही मनाया। भतीजी मायके डे ग्रूट ने बताया, लॉकडाउन के कारण जन्मदिन पर परिवार के लोग नहीं पहुंच सके थे। मैं हर हफ्ते उनके पास जाती हूं और काफी समय बिताती हूं। सबकुछ सामान्य होने के बाद मैं उनका जन्मदिन सेलिब्रेट करूंगी। 

104 साल के कोरोना सर्वाइवर को पीछे छोड़ा
कॉरनेलिया से पहले 104 साल के अमेरिकन लैपसीज को दुनिया का सबसे बुजुर्ग कोरोना सर्वाइवर घोषित किया गया था। वह द्वितीय विश्व युद्ध और 1918 में स्पेनिश फ्लू का भी सामना कर चुके हैं। स्पेनिश फ्लू में करीब 50 मिलियन लोगों की मौत हुई थी। इनका जन्म 1916 में हुआ था और कोरोना संक्रमण के लक्षण मार्च में दिखने शुरू हुए थे।

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